ब्रह्मा जी ने क्यों कहा अमरत्व किसी को प्राप्त नहीं हो सकता, जाने दंतकथा राक्षस असुर सुंद और उपसुंद की !

Amaratv kI katha 2023 : हिरण कश्यप कुल में निकुंभ नामक दैत्य था, उसके द्वारा उत्पन्न दो पुत्र हुए , जिनका नाम सुंद और उपसुंद पड़ा यह दोनों पुत्र बहुत ही बलशाली एवं बुद्धिजीवी थे | इनके द्वारा कालांतर में घोर तपस्या कर ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया गया था |







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amaratv kI katha : तब ब्रह्माजी द्वारा उनके कहने पर वर मांगने के दौरान यह दोनों भाइयों ने ब्रह्मा जी से आजीवन अमर होने की वर मांगने का निर्णय लिया | जिसे देख ब्रह्मा जी काफी चिंतित हो गए थे, और उनके द्वारा इन दोनों भाइयों को कहा जाता है कि, जो धरती लोक पर आया है उसकी मृत्यु निश्चित है | amaratv kI katha

amaratv kI kath : आप कोई और वरदान मार लीजिए तब दैत्यों द्वारा पूरे दुनिया में समस्त माया को मैं बस में कर लूं और हमें कोई भी मार न सके ऐसा वर मांगा जाता है | ब्रह्माजी द्वारा तथास्तु करके वरदान दिया जाता है. लेकिन ब्रह्मा जी द्वारा यह कहा जाता है कि, यदि तुम दोनों में आपसी विवाद होती है तो, एक दूसरे का मृत्यु का कारण तुम दोनों ही बनोगे..

amaratv kI katha : दोनों दैत्यों अपने अमृत्व का अहंकार सर चढ़ जाता है | और वह ऋषि-मुनियों की दुराचारीता करना शुरू कर देते हैं | मुनि द्वारा उत्पीड़न होते देख ऋषि द्वारा ब्रह्मा जी के पास पहुंच कर अपनी सारी घटाएं बताई जाती है |

amaratv kI kath : जिसे देख ब्रह्मा जी विश्वकर्मा जी से आग्रह करते हैं की एक ऐसी सुंदर रमणीय कन्या को तैयार करिए जो इन दोनों को अपनी ओर आकर्षित कर इन में फूट डाल दे विश्वकर्मा जी द्वारा वही किया जाता है जो ब्रह्मा जी ने कहा था | और एक ऐसी सुंदरी जिसका नाम तिलोत्तमा रखा गया था |

उसे उन दोनों दैत्यों के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है और तिलोत्तमा लड़की द्वारा दोनों से विवाह करने की प्रस्ताव रखी जाती है | और एक भाई कहता है मैं शादी करूंगा और दूसरा कहता है |

मैं शादी कर लूंगा इन दोनों के बीच फूट पड़ने शुरू हो जाती है | और यही इन दोनों का आपस में वर्चस्व की लड़ाई धरातल पर उतारने के कारण इनकी मृत्यु एक दूसरे के युद्ध के दौरान हो जाती है..

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